जालोर में लॉकडाउन में नरेगा में मिली यह खास सौगात, जानिये
Jalore

जालोर में लॉकडाउन में नरेगा में मिली यह खास सौगात, जानिये

मनरेगा के तहत 1.28 लाख ग्रामीणों को मिला रोजगार
जालोर. जालोर जिले में कोविड-19 में ग्रामीणों के लिए महात्मा गांधी नरेगा योजना वरदान साबित हो रही है। लॉक डाउन के दौरान स्थानीय स्तर पर 1.28 लाख ग्रामीणों को रोजगार मिलने से आर्थिक संबल मिला है। इधर, प्रत्येक राजस्व गांव में चार कार्यों के प्रस्ताव एक सप्ताह की अवधि में भिजवाने के निर्देश दिए गए हैं। जालोर जिले में लॉक डाउन के दौरान निर्माण कार्य गतिविधियां बाधित होने से ग्रामीणों के साथ रोजगार का संकट खड़ा हो गया था, वहीं अब तक प्रवासियों का आवागमन भी गांवों में शुरू हो गया है। अधिकतर प्रवासी होम क्वॉरंटीन के बाद स्थानीय स्तर पर रोजगार की मांग करने आगे आएंगे, ताकि अपने परिवार का गुजारा आसानी से चला सकें। ऐसी विकट परिस्थितियों में महात्मा गांधी नरेगा योजना उनको संबल प्रदान कर रही है। वर्तमान समय में जालोर जिले में सभी पंचायत समितियों में मनरेगा कार्य चल रहे हैं और 1.28 लाख श्रमिकों को कार्य पर नियोजित किया गया है।

पिछले वर्ष मई माह में श्रमिकों की तादाद 70 हजार के आस-पास रही थी। किन्तु इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण स्थानीय स्तर पर अन्य कार्यो में रोजगार उपलब्ध नहीं हो पाने से ग्रामीण मनरेगा कार्य में काफी रूचि ले रहे हैं। जिला कार्यक्रम समन्वयक एवं कलक्टर हिमांशु गुप्ता के अनुसार जालोर जिले में मनरेगा में 3476 कार्य चल रहे हैं और रोजगार की मांग के आधार पर स्थानीय स्तर पर और अधिक कार्य स्वीकृत किए जा रहे हैं। इस के लिए विकास अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि जरूरतमंद को रोजगार उपलब्ध करवाया जाएं। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि मनरेगा में प्रत्येक राजस्व गांव में एक गांव-एक काम के प्रस्ताव लिए जा रहे हैं, अगर कोई प्रवासी अपना जॉब कार्ड बनवाना चाहता है तो वह ग्राम पंचायत मुख्यालय पर जाकर अपना पंजीकरण करवा सकता है। साथ ही प्रगतिरत कार्यों के निरीक्षण निर्धारित प्रपत्र में भिजवाने के निर्देश दिए गए हैं।

जिले की ग्राम पंचायतों में कुल 5937 नये जॉबकार्ड बनाए गए है। महात्मा गांधी नरेगा कार्यस्थल पर कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए सामाजिक दूरी बनाए रखने की पालना करवाई जा रही है। श्रमिकों के लिए पर्याप्त छाया, पानी, दवाईयां एवं छोटे बच्चों के लिए पालना की व्यवस्था आदि कार्य को ग्राम विकास अधिकारियों, रोजगार सहायकों, मेटों, कनिष्ठ तकनीकी सहायकों को पाबंद किया गया है।

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