Jalore National RAJASTHAN Religious

एशिया का सबसे बडा कीड़ी नगरा राजस्थान के किस जिले मे और कितना बड़ा ….पढिए खबर में

केवलाराम परमार
भीनमाल।
सबसे बड़ा महल, हवेली, कोई परिवार या कॉलोनी तो आपने खूब देखी होगी, मगर चीटियों की सबसे बड़ी कॉलोनी देखनी हो तो जालोर जिले के भीनमाल उपखंड के गांव निम्बावास चले आइए। इस कॉलोनी को स्थानीय भाषा में कीड़ी नगरी या कीड़ी नगरा भी कहा जाता है। दावा तो ये भी है कि निम्बावास का कीड़ी नगरा संभवतया एशिया में सबसे बड़ा है। इस बात का अंदाजा आप इससे भी लगा सकते हैं कि निम्बावास का कीड़ी नगरा करीब डेढ़ सौ बीघा में फैला है। यहां करोड़ों चीटियां रहती हैं और रोजाना चार क्विंटल दाना खपता है।

भीनमाल से 13 किमी दूर है निम्बावास

बता दें कि जालौर के भीनमाल कस्बे से 13 किलोमीटर दूर स्थित गांव निम्बावास के बाहर बोर्ड लगा है, जिस पर गांव में कीड़ी नगरा होने की जानकारी और कीड़ी नगरा से संबंधित आवश्यक बातें लिखी हैं। गांव निम्बावास में चारागाह भूमि पर बसे इस कीड़ी नगरे से ग्रामीणों को खास लगाव है। गांव के भामाशाहों यहां चीटियों के लिए अनाज रखने, कीड़ी नगरे को सींचने (चीटियों को दाना डालने) का पुख्ता बंदोबस्त कर रखा है।

कीड़ी नगरा के तारबंदी

निम्बावास के इस कीड़ी नगरा के चारों तरफ तारबंदी भी करवाई हुई है ताकि यहां पर चीटियों को डाले गए नारियल का बुरा, अनाज, चूरमा, शक्कर, दलिया, बिस्किट आदि सामग्री खाने के लिए दूसरे बड़े जानवर प्रवेश ना कर सकें। चींटियों को दाना डालने के लिए हर पूर्णिमा व अमावस्या को मेले सा माहौल बनता है। यहां चीटियों को दाना डालने के लिए जालोर जिले के अलावा मारवाड़ क्षेत्र से दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। लगभग डेढ़ सौ बीघा क्षेत्र में आपको सिर्फ चींटियां ही दिखाई देगी। इस स्थान पर हर रोज करीब चार क्विंटल दाना चींटियों को डाला जाता है।

इन जिलों से आते श्रद्धालू

सुबह से लेकर शाम तक यहां लोग चीटियों को दाना देते नजर आते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं में महिलाओं की संख्या अधिक रहती है। चीटियों को दाना डालने के पश्चात महिलाएं भजन-कीर्तन करती हैं। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में सिरोही, बाड़मेर, पाली जिले के लोग भी शामिल हैं। लोग जैसे ही स्थल के बारे में सुनते हैं तो यहां पहुंच कर चीटियों के दान के लिए आतुर रहते हैं।

रहता है 15 दिन का स्टॉक

कीड़ी नगरे को सींचने के लिए लोग अनाज इत्यादि कट्टों में भरकर यहां लेकर आते हैं। भीनमाल के भामाशाह नाहर परिवार, लुकड़ परिवार भी हर 15 दिन में चीटियों के लिए दाना भिजवाते हैं। यहां दाना एकत्रित करने के लिए गोदाम भी बनाए हुए हैं। इस तरह यहां इतना दान इकट्ठा हो जाता है कि कम से कम 15 दिन तक आसानी से चलता है। आगामी पूर्णिमा व अमावस्या पर फिर दान इकट्ठा हो जाता है इस तरह से यह सिलसिला वर्षों से चला आ रहा है।

चीटियों को दान डालने की मान्यता

पिछले 4 साल में यहां आने वाले श्रद्धालुओं में काफी इजाफा हुआ है। निंबावास के कीड़ी नगरा की विशेषता यह है कि यहां की चींटियां आम चीटियों की तुलना में आकार में बड़ी हैं। लोगों की मान्यता है कि इनको आहार देने से दुखों का निवारण होने के साथ सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। आस्था के चलते दूर-दराज से लोग यहां अनाज, चूरमा, शक्कर, दलिया, बिस्किट इत्यादि लेकर पहुंचते रहते हैं।

shrawan singh
Contact No: 9950980481

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *