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समर्थकों की ईच्छा या राजनीतिक महत्वकांशा, नेताओं की बगावत के पीछे का क्या हैं कारण…?

 विधानसभा चुनाव 2023 में जालोर में भाजपा के लिए अपने ही नेता बने सिरदर्द

सायला।

“कभी भाई को भाई से अलग करती है
तो कभी बाप को बेटे से जुदा करती है
जितनी मर्ज़ी वफादारी निभा लो मगर
सियासत कहां किसी से वफ़ा करती है।”

किसी शायर की यह पंक्तियां राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 को लेकर जालोर में भाजपा के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर बिल्कुल सटीक साबित हो रही है। भाजपा द्वारा जोगेश्वर गर्ग को विधायक प्रत्याशी घोषित किया गया है। गर्ग के नाम की घोषणा के बाद भाजपा के अपने नेता ही बगावत पर उतर आए है और अपनी राजनीतिक महत्वकांशा को पूरा करने के लिए समर्थकों को आगे कर सियासत चलना शुरू कर दिया है।

ऐसा नही है कि चुनाव के समय राजनीतिक दलों में टिकट वितरण को लेकर असंतोष नहीं होता। यह स्वाभाविक भी है कि जो राजनीतिक कार्यकर्ता वर्षों मेहनत करें और टिकट वितरण के समय उसे दरकिनार कर दिया जाए तो राजनीति में निष्ठा और समर्पण का पैमाना अपने आप दफन होने लगता है।

ऐसे में कल जो नेता पार्टी का झंडा उठाये नारे लगा रहे थे वो ही अब टिकट नही मिलने पर शोर मचा रहे है। पूर्व जिला परिषद सदस्य एवं भाजपा मूल संगठन में जिला मंत्री पवनी मेघवाल ने टिकट नही मिलने पर अपनी ही पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया। साथ ही पवनी ने गत दिनों प्रेस वार्ता में भाजपा प्रत्याशी गर्ग के खिलाफ विरोध के स्वर मुखर कर दिए और निर्दलीय ताल ठोक दी।

इसके अलावा भाजपा प्रदेश एससी मोर्चा के सदस्य शंकरलाल भादरू भी टिकट नही मिलने पर नाराज है। भादरू ने भी शुक्रवार को अपने समर्थकों को आगे कर निर्दलीय चुनाव लडने के संकेत दिए है।
वैसे भी एक पार्टी में एक सीट पर टिकट के लिए एक से अधिक आंकाक्षी होते है।

दलों कि संवैधानिक मर्यादा है कि वे चुनाव में किसी एक को ही टिकट दे सकते है। ऐसे में बाकी को या तो पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी का समर्थन करना होगा या फिर किसी दूसरे दल से टिकट लेकर या निर्दलीय चुनाव में खडा होना होगा। तीसरा वह पार्टी हाईकमान और टिकट वितरणकर्ताओं के सामने खुलकर अपनी नाराजगी का प्रदर्शन कर मन हल्का करे। चौथा और अनैतिक विकल्प यह है कि वह पार्टी में रहकर ही भीतरघात कर पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी को हराकर अपना बदला लें और अगले चुनाव में अपनी दावेदारी का विकल्प खुला रखें।

वही भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि भाजपा के असली कार्यकर्ता कभी पार्टी नही छोडते है और पार्टी के लिए प्रतिबद्ध रहते है। इन सभी के बावजूद कुल मिलाकर यह तो तय है कि अगर भाजपा प्रत्याशी जोगेश्वर गर्ग के अलावा पवनी मेघवाल एवं शंकर भादरू भी चुनावी मैदान में उतरते है तो इसका सीधा नुकसान भाजपा को ही होगा और कांग्रेस के लिए यह फायदेमंद साबित होगा।

shrawan singh
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