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खतरे पर डाला पर्दा आखिर जालोर और सिरोही तक पहुंच ही गया कोरोना

– प्रवासियों को जालोर और सिरोही लाने के मामले में दोनों ही जिलों के कलक्टर्स ने पहले स्तर पर जताया था खतरा, लेकिन दूसरे ही दिन संशोधित आदेश भी जारी किया
जालोर. जब पूरे देश में कोरोना का खतरा बढ़ता जा रहा था उन हालातों में भी जालोर और सिरोही जिले देश के चुनिंदा क्षेत्रों में शामिल थे, जहां कोरोना का एक भी केस नहीं था। ये हालात पुलिस और प्रशासन की गंभीरता का ही परिणाम था। लेकिन हाल ही में प्रवासियों को विभिन्न राज्यों से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की राजनीतिक हौड़ के बीच कोरोना फैलने की संभावना आखिर कार बुधवार को पुख्ता हो गई। बुधवार को एक साथ चार पॉजिटिव केस जालोर जिले में मिले, जिसके बाद प्रशासनिक मेहनत पर पानी फिर गया। लेकिन कलक्टर हिमांशु गुप्ता ने त्वरित कदम उठाते हुए प्रभावित वीराणा, रायथल गांव में कफ्र्यू लगा दिया। अगले ही दिन 7 मई को ऐसे ही हालात सिरोही में भी बने यहां भी 3 दिन पूर्व अहमदाबाद से पहुंचे एक युवक की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद यहां भी हालात विकट हो गए। यह प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि राजनीतिक वाहवाही लूटने की हौड के कारण ही हुआ है। सीधे तौर पर जब तक प्रवासी जिले में नहीं पहुंचे थे जालोर और सिरोही जिले में एक भी कोरोना पॉजिटिव केस सामने नहीं आया था। वहीं अब इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि दोनों ही जिलों में हालात और भी बदल सकते हैं, क्योंकि प्रवासियों को लाने की इस अंधी हौड़ में बड़ी तादाद में संक्रमित लोग भी जालोर और सिरोही तक जरुर पहुंचे हैं और इनके चलते संभावित गंभीर परिणाम अगले कुछ दिनों में देखने को मिल सकते हैं।
इस तरह बदले आदेश
सीधे तौर पर जालोर, सिरोही समेत पूरे मारवाड़ क्षेत्र से बड़ी तादाद में प्रवासी गुजरात, महाराष्ट्र कर्नाटका, आंध्रा समेत अन्य राज्यों में है। गुजरात और महाराष्ट्र सीधे तौर पर जालोर के सीमावर्ती क्षेत्र है। जब प्रवासियों को राजस्थान लाने के लिए जनप्रतिनिधि पैरवी कर रहे थे उसी दौरान जालोर और सिरोही कलक्टर ने संभावित खतरा जताया था। 27 अपे्रल को जालोर कलक्टर हिमांशु गुप्ता और सिरोही कलक्टर ने अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, राजकोट, भावनगर कलक्टर को पत्र भेजा था, जिसमें राजस्थान के प्रवासियों को जालोर और सिरोही जिले में आने की अनुमति नहीं देने की बात कही गई थी।
अगले ही दिन बदला माहौल
दोनों कलक्टर्स के ये आदेश जिले की सुरक्षा और मानव स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण थे, लेकिन उनके ये आदेश अप्रत्यक्ष रूप से राजनीति की भेंट चढ़ गए। दोनों ही बड़े दलों ने प्रवासियों में अपनी पैठ बनाने के लिए दोनों जिलों के स्थायी नागरिकों के मानव स्वास्थ्य को न केवल खतरे में डाला, बल्कि इसके परिणाम अब सीधे तौर पर नजर आने लगे हैं। स्थानीय लोगों में यह भी चर्चा है कि इन लोगों की बड़े स्तर पर स्वास्थ्य जांच की आवश्यकता है। क्योंकि जालोर शहर के मुकाबले आस पास के गांवों में बहुत बड़ी तादाद में प्रवासी समूह के रूप में पहुंचे हैं और उनके स्वास्थ्य की जांच भी फौरी तौर पर ही हुई है।
लाने थे केवल श्रमिक
संशोधित आदेश के तहत ऑन लाइन रजिस्टे्रशन के बाद मेडिकल जांच के बाद ही केवल श्रमिकों को ही राजस्थान लाया जाना चाहिए था, लेकिन हकीकत इसके विपरीत ही नहीं, श्रमिक से कहीं ज्यादा वे प्रवासी पहले पहुंच गए तो सक्षम थे, जबकि श्रमिक बड़ी मशक्कत के बाद अपने क्षेत्रों तक पहुंच पाए हैं या पहुंच रहे हैं। सीधे तौर पर डब्ल्यूएचओ ने माना था कि कोरोना की चैन तोडऩे के लिए लॉक डाउन जरुरी है और भीड़ तंत्र से बचना होगा, लेकिन केवल वाहवाही और सियासी दांव पेच में मानव स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया गया है।

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