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बागोड़ा में हजारों किसानों का महापड़ाव, कल दोपहर तक का एल्टीमेटम

बागोडा मे धरने पर बैठे किसानो की ये है प्रमुख मांगे देखे वीडियो मे

बागोड़ा। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित भारतमाला सड़क परियोजना के तहत बनने वाले एक्सप्रेस-वे के विरोध में किसानों का बागोड़ा में पिछले 84 दिनों से लगातार आंदोलन ने शुक्रवार को रंग पकड़ लिया है, प्रदेश के हजारों किसान बागोड़ा-दादाल सड़क मार्ग पर किसान बाग में महापड़ाव डालकर राष्ट्रीय किसान नेता एंंव सुप्रीम कोर्ट वकील चौधरी रमेश दलाल के नेतृत्व में स्वीकृत योजना का विरोध कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि लगातार धरना देने के बाद भी सरकार व नेता उनकी कोई सुनवाई नहीं करने से गांदीवादी तरिके से अब देशभर के किसान महापड़ाव पर बैठे हुए हैं। किसानों का कहना है कि जब तक प्रस्तावित हाईवे को जिले की सायला, बागोड़ा, भीनमाल, चितलवाना व सांचोर तहसील के गांवो मे होकर प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे को नेशनल हाईवे 68 पर ले जाने का आदेश पारित नही करेगे तब तक इसका प्रदर्शन जारी रहेगा। प्रदेश के हनुमानगढ़ बीकानेर सूरतगढ़ बाड़मेर रामसर सिवाना समेत कई गांवों के किसान बागोड़ा उपखंड मुख्यालय पर इस महापड़ाव में शामिल हैं।

आंदोलन मे ये रहे मौजूद

महापड़ाव में राष्ट्रीय किसान नेता एवं सुप्रीम कोर्ट के वकील चौधरी रमेश दलाल, राजस्थान किसान संघर्ष समिति के जिला सयोजक विक्रमसिंह पुनासा, जिलाध्यक्ष बद्रीदान चारण, जिला उपाध्यक्ष भगवानाराम विश्नोई, कुपाराम सांचोर की ओर से किसानों को संबोधित किया गया है।

यह है किसानों की प्रमुख मांगे

भारतमाला का सर्वे होने के बाद से ही जिले के किसान प्रदर्शन कर रहे हैं किसानों की मांग है की तीन फसली सिंचित भूमि छोड़ के असिंचित कृषि भूमि से हाईवे निकाला जाए । मेगा हाईवे पचपदरा से वाया सिणधरी, रामजी का गोल होते हुए परियोजना की सड़क एनएच 68 पर ले जाया जाए। इस सर्वे में भारतमाला परियोजना से नर्मदा नहर भी प्रभावित होगी जो इससे एक लिफ्ट 13 – 11 शब्द माइनस 371 डिग्री आवक 50000 हेक्टेयर भूमि नकारा हो रही है सर्वे में जगह-जगह पर मोड दिए गए हैं। किसानों का कहना है कि भूमि अवाप्ति के दौरान आने वाले रास्तों पर खेतों के दो भागों में विभाजित होने पर ओवरब्रिज व्यवस्था की जाए तथा रोड के दोनों तरफ लिंक रोड बनाकर किसानों के खेत में आने-जाने की व्यवस्था की जाए। किसानों की मांग है कि भारतमाला परियोजना के तहत अब अधिग्रहण भूमि का उचित किसानों को बाजार दर पर मुआवजा दिया जाए इन विभिन्न मांगों को लेकर किसान 85 दिनों से धरने पर अड़े हुए हैं वहीं लगातार किसान भूमि अधिग्रहण के विरुद्ध आंदोलन कर रहे हैं जिसके चलते आज प्रदेश के कई जिलों से किसान महापड़ाव में डेरा डाले बैठे हुए हैं