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#SAYLA करोड़ों की जमीन का फर्जीवाड़ा, बेंगलूरु के प्रवासी भाइयों से 5.51 करोड़ ठगे … पढ़िए पूरी खबर

  • जालौर में ‘हवाला’ और सायला में ‘फर्जी रजिस्ट्री’ का खेल

राजस्थान आगाज़ @ ​सायला।  राजस्थान में भू-माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब वे सरकारी दस्तावेजों और रजिस्ट्रियों के साथ भी बेखौफ खिलवाड़ कर रहे हैं। ताजा मामला सायला क्षेत्र का है, जहां बेंगलूरु में व्यापार करने वाले छह प्रवासी भाइयों को झांसे में लेकर साढ़े पांच करोड़ रुपए से अधिक की ठगी को अंजाम दिया गया है। पीड़ितों का आरोप है कि आरोपियों ने मिलीभगत कर फर्जी रजिस्ट्री तैयार की और करोड़ों रुपए हड़प लिए।

पीड़ित जबरसिंह पुत्र वगतसिंह ने जिला कलेक्टर को दिए ज्ञापन में बताया कि वे छह भाई बेंगलूरु में व्यवसाय करते हैं। गांव के ही मोड़सिंह ने उन्हें आसाणा गांव में मुख्य हाईवे पर 0.7000 हेक्टेयर जमीन दिखाई थी। सौदा 5 करोड़ 51 लाख रुपए में तय हुआ। हैरत की बात यह है कि आरोपियों ने विश्वास में लेने के लिए ‘हवाला’ का सहारा लिया। टोकन मनी के रूप में 1.11 करोड़ रुपए पहले लिए गए और रजिस्ट्री के दिन (2 अप्रैल 2026) बाकी के 4 करोड़ 40 लाख रुपए जालौर के एक ज्वेलरी शोरूम के पास कोड के जरिए दिलवाए गए। आरोपियों ने 10 रुपए के नोट का फोटो व्हाट्सएप पर भेजकर उसे ‘पहचान’ (Token) के तौर पर इस्तेमाल किया। पीड़ित का आरोप है कि रजिस्ट्री होने के बाद जब वे गांव पहुंचे, तो ग्रामीणों से पता चला कि उनके साथ बड़ा धोखा हुआ है। जो रजिस्ट्री उन्हें थमाई गई थी, वह कूटरचित (फर्जी) थी। आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार कर असली बताकर पेश किए थे। ठगी का अहसास होने पर जब पीड़ित ने सायला थाने में रिपोर्ट दी, तो वहां कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद अब पीड़ितों ने जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।

इन सवालों के घेरे में प्रशासन:

  • उप-पंजीयक कार्यालय की भूमिका: क्या तहसील कार्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी ‘फर्जी रजिस्ट्री’ संभव है?
  • पुलिस की ढिलाई: सायला पुलिस ने रिपोर्ट मिलने के बावजूद तत्काल एक्शन क्यों नहीं लिया?
  • हवाला नेटवर्क: शहर के बीचों-बीच करोड़ों के हवाला का कारोबार क्या प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा है?

पीड़ित का पक्ष – “हमने अपनी मेहनत की पूरी कमाई (5.51 करोड़) आरोपियों को दे दी। उन्होंने हमें जाली कागजात थमा दिए। अब सायला पुलिस भी हमारी सुनवाई नहीं कर रही है। हमें इंसाफ चाहिए और हमारी राशि बरामद की जाए।” — जबरसिंह (पीड़ित), निवासी चौराऊ